एक समय की बात है ! एक स्कूल मे राम और गोपाल नाम के दो दोस्त पढते थे ! दोनो बहुत ही होनहार एवं लगनशील थे और हर साल क्लास में राम प्रथम एवं गोपाल द्वितीय स्थान प्राप्त करते थे ! एक बार राम कि माँ बीमार पड़ गयी, इस कारण राम काफ़ी समय तक स्कूल नही जा पाया ! करीब २ माह के बाद जब वो स्कूल गया तब सबको मालुम चला कि राम कि माता जी का देहान्त हो गया है ! साथ ही साथ सब यह सोचने लगे कि इस साल राम जरूर परीक्षा में द्वितीय स्थान पर आयेगा ! परन्तु अगले महीने जैसे हि परीक्षाफ़ल (रिजल्ट) आया सब ये जानकर हैरान रह गये कि हर बार कि तरह ही राम इस बार भी प्रथम आया हैं !
इस का करण जानने कि उत्सुकता में जब हेड मास्टर साहब ने दोनो की उत्तर-पुस्तिकाए देखी तो पाया कि गोपाल ने बहुत से एसे सवालों के जवाब नही लिखे थे जिनका जवाब कोई भी साधरण विद्याथी आसानी से लिख सकता था !
अतः हेड मास्टर साहब ने गोपाल को अपने पास बुलाकर कारण जानना चाहा, पहले तो गोपाल ने मना किया और बोला कि राम उससे ज्यादा मेहनती है, परन्तु जब उसने देखा कि उसकी इस बात को कोइ असर नही हो रहा तब उसने सारी बातें बता दी कि जब उसे पता चला कि राम कि माँ का निधन हो गया है तो उसे इस तरह से सफ़लता प्राप्त करना अच्छा नही लगा इसलिये उसने जानबुझ कर कई सवालों के ज़वाब आधूरे छोड दिए !
उसकी ऎसी बातें सुनकर हेड मास्टर बोले- भले ही तुमनें अपनी स्कूल की परीक्षा में द्वितीय आये हो लेकिन जीवन और दोस्ती कि परिक्षा में तुमनें प्रथम स्थान प्राप्त किया है !
Sunday, August 2, 2009
Thursday, July 30, 2009
खरगोशो की चालाकी !!! जातक कथाएँ
एक बार बरसात के मौसम में पानी ना बरसने के कारण सूखा पर गया ! तब हाथियौं ने अपने राजा
के पास जाकर कहा- ’महाराज़ ! हम प्यासे मर रहे हैं, बिन पानी के जीवित नही रह सकते !’
राज़ा बोला - आप लोग परेशान ना हो! पास ही में एक बडा तलाब हैं ! मै तुम सबको वही पर लेकर चलता हूँ ! सभी हाथी राजा के साथ उस तलाब पर गये और पानी देखकर खुशी से उसमे कूदने लगे !
वही पास मेन तलाब के किनारे खरगोशो का एक झुण्ड रहता था ! तलाब मे हाथियौं को देख कर खरगोश बहुत चिन्तित हो गये ! उन्हे लगा कि अब उन्हे अपना घर छोर कर कही और जाना पडेगा ! अत: रात मे उन्होने सभा बुलाई और बडे और अनुभवी लोगो कि राय माँगी गई ! एक बुढे खरगोश ने सबको विश्वास दिलाया कि वो मामले को बिना परेशानी के हल कर लेगा !
अगले दिन बुढा खरगोश हाथियौं के राज़ा के पास गया, पर उसे छोटा सा जानवर समझ कर राजा हाथी ने उसका मजाक उडाया और उसे ही अपना स्थान छोड कर भाग जाने की सलाह दे डाली !
राजा हाथी की बात सुन कर खरगोश थोडा डर गया पर उसने हिम्मत नही हारी और हाथी राजा से बोला- ’ठीक है, अभी तक मैने आपको प्यार से समझाया आप नही माने अब मेरे स्वामी भगवान चाँद ही आकर आपको सजा देंगे ! आज रात ही आप लोगो को सजा मिलेगी जब खुद चन्द्र देवता इस तलाब मे गुस्से मे उतऱेंगे !
बुढे खरगोश की बात सुनकर हाथी राजा के कान खडे हो गये ! उसे लगा कि इस बात मे कितनी सच्चाई है उसे देखना चहिए ! कही सच मे उसका और उसकी प्रजा का विनाश ना हो जाये !
दूसरी तरफ़ बुढा खरगोश जानता था कि आज रात पुर्णिमा कि रात है ! रात होते हि पूरे चाँद का प्रतिबिम्ब साफ़-साफ़ तलाब मे नज़र आ रहा था ! बुढा खरगोश शाम से हि अपने लोगो के साथ तलाब के किनारे बैठा सही समय का इन्तज़ार कर राहा था, जैसे ही राजा हाथी अपने साथीयो के साथ तलाब पर आया, खरगोश ने नज़र बचाकर तलाब मे एक छोटा पत्थर फैंक दिया साथ हि साथ चिल्लाने लगा कि "हाथीयो को देखते ही चान्द देवता गुस्से से कापने लगे, हाथीयो को देखते ही चान्द देवता गुस्से से कापने लगे !"
हाथीयो ने भी देखा कि तलाब के अन्दर चान्द हिल रहा है ! उन्होने तुरन्त अपने राजा से सलाह मशवरा किया और बोले कि शायद सच मे चाँद भगवान हमारे याहा आने से खुश नही है ! अच्छा होगा हम ये तलाब तुरन्त छोड दे ! राज़ा के मुह से ऎसा सुनते ही सारे हाथी वाहाँ से तुरन्त भाग खडे हुए !
सीख : सही दिशा मे लगाया गया दिमाग हमेशा सफ़लता दिलाता है !
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