shah

Sunday, August 2, 2009

दोस्ती का रिश्ता

एक समय की बात है ! एक स्कूल मे राम और गोपाल नाम के दो दोस्त पढते थे ! दोनो बहुत ही होनहार एवं लगनशील थे और हर साल क्लास में राम प्रथम एवं गोपाल द्वितीय स्थान प्राप्त करते थे ! एक बार राम कि माँ बीमार पड़ गयी, इस कारण राम काफ़ी समय तक स्कूल नही जा पाया ! करीब २ माह के बाद जब वो स्कूल गया तब सबको मालुम चला कि राम कि माता जी का देहान्त हो गया है ! साथ ही साथ सब यह सोचने लगे कि इस साल राम जरूर परीक्षा में द्वितीय स्थान पर आयेगा ! परन्तु अगले महीने जैसे हि परीक्षाफ़ल (रिजल्ट) आया सब ये जानकर हैरान रह गये कि हर बार कि तरह ही राम इस बार भी प्रथम आया हैं !
इस का करण जानने कि उत्सुकता में जब हेड मास्टर साहब ने दोनो की उत्तर-पुस्तिकाए देखी तो पाया कि गोपाल ने बहुत से एसे सवालों के जवाब नही लिखे थे जिनका जवाब कोई भी साधरण विद्याथी आसानी से लिख सकता था !
अतः हेड मास्टर साहब ने गोपाल को अपने पास बुलाकर कारण जानना चाहा, पहले तो गोपाल ने मना किया और बोला कि राम उससे ज्यादा मेहनती है, परन्तु जब उसने देखा कि उसकी इस बात को कोइ असर नही हो रहा तब उसने सारी बातें बता दी कि जब उसे पता चला कि राम कि माँ का निधन हो गया है तो उसे इस तरह से सफ़लता प्राप्त करना अच्छा नही लगा इसलिये उसने जानबुझ कर कई सवालों के ज़वाब आधूरे छोड दिए !
उसकी ऎसी बातें सुनकर हेड मास्टर बोले- भले ही तुमनें अपनी स्कूल की परीक्षा में द्वितीय आये हो लेकिन जीवन और दोस्ती कि परिक्षा में तुमनें प्रथम स्थान प्राप्त किया है !